Engineer’s Day कब मनाया जाता है, Abhiyanta Divas क्यों मनाया जाता है, इंजीनियर दिवस मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया

Engineer’s Day 2022: इंजीनियर दिवस क्यों मनाया जाता है, कब मनाया जाता है, मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया जी के जीवन परिचय। Abhiyanta Divas पर सभी इंजीनियरों को बधाई दी जाती है। इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। आजकल सोशल मीडिया, फोन का इस्तेमाल एक-दूसरे को बधाई के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है। विश्वेश्वरैया जी को याद कर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

Abhiyanta Divas क्यों मनाया जाता है?

इंजीनियर्स डे हर साल 15 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन एक महान इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्मदिन है, इंजीनियर दिवस हमारे देश के प्रसिद्ध इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की याद में मनाया जाता है।

इस दिन को मनाने का लक्ष्य हमारे देश के युवाओं को इंजीनियरिंग करियर की ओर प्रेरित करना और हमारे देश के उत्थान में योगदान देने वाले इंजीनियरों की सराहना करना है। इंजीनियर्स दिवस दुनिया के सभी इंजीनियरों का सम्मान करता है। देश के बड़े-बड़े इंजीनियरों ने देश के विकास के लिए कई शोध किए।

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Mokshagundam Visvesvaraya Biography- Engineer’s Day

  • पूरा नाम मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया
  • जन्म 15 सितम्बर, 1960
  • जन्म स्थान मुद्देनाहल्ली गाँव, कोलर जिला, कर्नाटका
  • माता-पिता वेंकचाम्मा – श्रीनिवास शास्त्री
  • मृत्यु 14 अप्रैल 1962
Abhiyanta Divas

विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1860 को मैसूर रियासत में हुआ था, जो आज कर्नाटक राज्य बन गया है। उनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। उनकी मां वेंकचम्मा एक धार्मिक महिला थीं।

जब विश्वेश्वरैया 15 वर्ष के थे, तब उनके पिता की मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा (साक्षरता दिवस) चिकबल्लापुर से पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए बैंगलोर चले गए। 1881 में, विश्वेश्वरैया ने मद्रास विश्वविद्यालय के सेंट्रल कॉलेज, बैंगलोर से बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की।

Mokshagundam Visvesvaraya Career

इसके बाद उन्हें मैसूर सरकार से मदद मिली और उन्होंने इंजीनियरिंग के लिए पूना के साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। 1883 में वे एलसीई और एफसीई परीक्षा में प्रथम आए। इंजीनियरिंग पास करने के बाद, विश्वेश्वरैया को बॉम्बे सरकार से नौकरी का प्रस्ताव मिला, और उन्हें नासिक में सहायक अभियंता के रूप में नौकरी मिल गई।

एक इंजीनियर के रूप में उन्होंने कई अद्भुत काम किए। उन्होंने सिंधु नदी से सुक्कुर गांव में पानी की आपूर्ति की, साथ ही एक नई सिंचाई प्रणाली 'ब्लॉक सिस्टम' की शुरुआत की। उन्होंने बांध में स्टील के दरवाजे लगवाए, ताकि बांध से पानी का बहाव आसानी से रोका जा सके।

उन्होंने मैसूर में कृष्णराज सागर बांध के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वेश्वरैया ने और भी कई ऐसे कार्य किए, जिनकी सूची अंतहीन है। 1903 में पुणे के खड़कवासला जलाशय में एक बांध बनाया गया था।

इसके बाद ग्वालियर में तिगरा बांध और कर्नाटक के मैसूर में कृष्णा राजा सागर का निर्माण किया गया। कावेरी नदी पर बने कृष्णा राजा सगर को विश्वेश्वरैया ने अपनी देखरेख में बनवाया था, जिसके बाद इस बांध का उद्घाटन किया गया।

जब यह बांध निर्माणाधीन (under construction) था, तब यह एशिया का सबसे बड़ा जलाशय था। 1906-07 में भारत सरकार ने उन्हें जलापूर्ति और जल निकासी व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए Aden भेजा।

हैदराबाद सिटी बनाने का पूरा श्रेय विश्वेश्वरैया जी को ही जाता है। उन्होंने वहां एक बाढ़ सुरक्षा प्रणाली तैयार की। इसकेबाद उन्होंने विशाखापत्तनम बंदरगाह को समुद्री कटाव से बचाने के लिए एक प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

विश्वेश्वरैया को आधुनिक मैसूर यानि कर्णाटक राज्य का जनक कहा जाता है। जब उन्होंने मैसूर सरकार के साथ काम किया, तो उन्होंने मैसूर साबुन फैक्ट्री, परजीवी प्रयोगशाला, आयरन एंड स्टील फैक्ट्री, पॉलिटेक्निक संस्थान, बैंगलोर कृषि विश्वविद्यालय, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, मैसूर चैंबर्स ऑफ कॉमर्स विश्वविद्यालय और विश्वेश्वरैया इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की थी। इसके साथ ही अन्य शिक्षण संस्थान और कारखाने भी स्थापित किए गए।

इंजीनियर दिवस का इतिहास

वर्ष 1968 में, भारत सरकार द्वारा डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जन्म तिथि को 'इंजीनियर दिवस' के रूप में घोषित किया गया था। तब से हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। दरअसल, विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1860 को मैसूर (कर्नाटक) के कोलार जिले में हुआ था। एक इंजीनियर के रूप में, डॉ मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने मैसूर में कृष्णराज सागर बांध, पुणे में खड़कवासला जलाशय और ग्वालियर में तिगरा बांध सहित देश में कई बांधों का निर्माण किया है।

इतना ही नहीं हैदराबाद को शहर बनाने का पूरा श्रेय डॉ. विश्वेश्वरैया को जाता है। उन्होंने वहां एक बाढ़ सुरक्षा प्रणाली तैयार की, जिसके बाद वे पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गए। उन्होंने विशाखापत्तनम बंदरगाह को समुद्री कटाव से बचाने के लिए एक प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विश्वेश्वरैया को आधुनिक मैसूर राज्य का जनक भी कहा जाता है। उन्होंने मैसूर सरकार के साथ कई कारखानों और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की, विशेष रूप से मैसूर साबुन फैक्ट्री, मैसूर आयरन एंड स्टील फैक्ट्री, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, मैसूर चैंबर्स ऑफ कॉमर्स श्री जयचमराजेंद्र पॉलिटेक्निक संस्थान, बैंगलोर एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग।

  • जन्म वर्ष 1860 में कर्नाटक में हुआ था।
  • निधन वर्ष 1962 में बैंगलोर, कर्नाटक में हुआ था।
  • 1909 में मैसूर राज्य के मुख्य अभियंता के रूप में कार्य किया।
  • वर्ष 1955 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
  • 1895 में सुक्कुर नगर पालिका के लिए वाटरवर्क्स का डिजाइन और संचालन किया।
  • भारत सरकार ने उन्हें 1906-07 में जल आपूर्ति और जल निकासी व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए अदन (यमन) भेजा।
  • वर्ष 1908 में हैदराबाद में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद, उन्होंने शहर को भविष्य की बाढ़ से बचाने के लिए एक जल निकासी प्रणाली तैयार की।
  • वर्ष 1903 में पुणे में खडकवासला जलाशय में स्वचालित वियर फ्लडगेट्स की एक प्रणाली को डिजाइन और पेटेंट कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • 1915 में, जनता की भलाई में उनके योगदान के लिए किंग जॉर्ज पंचम द्वारा उन्हें ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के नाइट कमांडर के रूप में नाइट की उपाधि दी गई थी।
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