Valentine's Day 2023 | वैलेंटाइन दिवस क्यों मनाया जाता है? आइये जानते जानते हैं संत वेलेंटाइन का इतिहास और कहानी

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Valentine's Day in Hindi 2023: वैलेंटाइन दिवस कब मनाया जाता है? वेलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है? आइये जानते जानते हैं संत वेलेंटाइन का इतिहास और वेलेंटाइन डे की कहानी।

इस दिन हर व्यक्ति अपने जीवन साथी, अपने खास दोस्त, अपने परिवार और अपने सबसे अच्छे दोस्तों के साथ समय बिताता है। ऐसे में पादरी वैलेंटाइन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें याद करते हैं.

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Valentine's Day Kab Manaya Jata Hai?
Date वैलेंटाइन दिवस हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है।
क्यों संत वैलेंटाइन की याद में 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाया जाता है।
विवरण वैलेंटाइन मुख्य रूप से प्रेमियों के लिए प्यार के त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
Valentine's Day

वैलेंटाइन डे कब मनाया जाता है?

हर साल 14 फरवरी को पूरी दुनिया में 'वेलेंटाइन डे' मनाया जाता है। 14 फरवरी को मनाया जाने वाला यह दिन अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग मान्यताओं के साथ मनाया जाता है। लोग इस दिन अपने प्यार का इजहार करते हैं और एक दूसरे को तोहफे और फूल देकर अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं।

भारत में वैलेंटाइन डे की प्रथा 1992 के आसपास शुरू हुई थी।

वेलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है?

दुनिया में प्यार ना हो तो जिंदगी में खुशी नहीं हो सकती, वैसे तो प्यार कभी भी समय को देखकर व्यक्त नहीं किया जाता है, बल्कि बिना बोले प्यार का इजहार किया जाता है. प्रेम बलिदान विश्वास का एक ऐसा धागा है, जिसे केवल महसूस किया जा सकता है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।

जब ऐसी प्यारी अनुभूति को उत्सव के रूप में मनाया जाता है तो वह दिन एक यादगार दिन बन जाता है। जिंदगी में जब प्यार ही सब कुछ है तो इस अनमोल एहसास को वक्त देना भी बहुत जरूरी है और वक्त शायद भागती-दौड़ती दुनिया में कहीं खो गया है, वक्त एक ऐसा पंछी है, जो हाथ से निकल गया तो लौट कर नहीं आता, इसलिए जिंदगी आनंद ले और खूबसूरत यादों को कैद करे।

इसलिए जब भी परिवार में शादी, पूजा व्रत का त्योहार मनाए जाते हैं तो अपनों के बीच प्यार और भी गहरा होता है, प्यार को किसी खास दिन की जरूरत नहीं होती, बल्कि वक्त की तेज रफ्तार में कहीं न कहीं इसकी जरूरत है।

वेलेंटाइन डे प्यार से भरा एक ऐसा खुशहाल त्योहार है। वैलेंटाइन डे के दिन हर कोई अपने प्यार के लिए समय निकालता है, प्यार का इजहार करता है। हर कोई इस दिन की प्लानिंग करता है, इसलिए वैलेंटाइन डे मनाया जाता है।

हर त्योहार की एक कहानी होती है, इस दिन को संत वेलेंटाइन की याद में मनाया जाता है।

वेलेंटाइन डे की कहानी (संत वेलेंटाइन का इतिहास)

वेलेंटाइन एक दिन का नाम नहीं है, यह रोम में रहने वाले एक पुजारी का नाम है, उस समय रोम पर क्लॉडियस का शासन था, जो एक शक्तिशाली शासक बनना चाहता था.

राजा को और अधिक सैनिकों की आवश्यकता महसूस हुई। क्लॉडियस का मानना था कि एक अविवाहित आदमी अच्छी तरह से लड़ सकता है, इसलिए उसने सेना में पारंपरिक विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया।

क्योंकि उसने देखा कि रोम के लोग, जिनके परिवार, पत्नियां और बच्चे हैं, सेना में नहीं जाना चाहते थे, तो उस शासक ने एक नियम बनाया, जिसके अनुसार उन्होंने भविष्य के सभी विवाहों पर प्रतिबंध लगा दिया।

यह बात किसी को अच्छी नहीं लगी, लेकिन उस शासक के सामने कोई कुछ नहीं कह सका। उस समय संत वैलेंटाइन रोम में पादरी थे। पादरी वैलेंटाइन को भी यह बात अच्छी नहीं लगी। वह रोमन राजा क्लॉडियस के आदेशों के खिलाफ था। उन्होंने सैनिकों से गुपचुप तरीके से शादी करना शुरू कर दिया।

एक दिन एक जोड़ा आया, जिसने शादी करने की इच्छा जताई तो पुजारी वैलेंटाइन ने चुपचाप एक कमरे में उनकी शादी करा दी।

लेकिन शासक को पता चला और पुजारी वैलेन्टिन को कैद कर लिया और मौत की सजा सुनाई गई। जब पादरी वैलेंटाइन जेल में थे, तो सभी उनसे मिलने आते थे, उन्हें गुलाब और उपहार देते थे, वह सभी को बताना चाहते थे कि वे सभी प्यार में विश्वास करते हैं.

लेकिन 14 फरवरी 269 A.D. ई को उन्हें मौत की सजा तय की गई, उस दिन उनकी मृत्यु हो गई, मृत्यु से पहले पादरी वेलेंटाइन ने एक पत्र लिखा की "वैलेंटाइन प्यार करने वालों के लिए ख़ुशी ख़ुशी कुर्बान हुआ है और प्यार को जिन्दा रखने की गुहार करता है" इसलिए उस दिन से लेकर आज तक संत वैलेंटाइन की याद में 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के रूप में मनाया जाता है।

फिर 496 ई. में पोप ग्लेसियस ने 14 फ़रवरी को ‘सेंट वेलेंटाइन्स डे’ घोषित कर दिया। समाज के लोगों के बीच आपसी प्यार व सद्भाव की कामना से शुरू हुआ वेलेंटाइन अब मुख्य रूप से प्रेमी जोड़ों के प्यार के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा है।

भारत में भी वैलेंटाइन डे मनाने का चलन काफी बढ़ गया है। भारतीय युवाओं ने वैलेंटाइन डे को बड़ी धूमधाम से मनाना शुरू कर दिया है। युवा जोड़े एक दूसरे को वैलेंटाइन कार्ड से लेकर तरह-तरह के महंगे तोहफे देने लगे हैं।

ऐसा भी मन जाता है की जब संत वैलेंटाइन को फांसी दिया जा रहा तो जेलर ने उनसे उनकी आखरी इच्छा पूछा, उन्होंने अपनी अंधी बेटी के लिए प्रार्थना करने को कहा। संत वैलेंटाइन की प्रार्थना से ऐसा चमत्कार हुआ कि उनकी बेटी की आंखों की रोशनी आ गई और वह देखने लगी। इससे प्रभावित होकर जेलर ने ईसाई धर्म अपना लिया।

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