International Mountain Day in Hindi | अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय दिवस कब और क्यों मनाया जाता है | Parvat Divas

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International Mountain Day in Hindi 2022: (World Parvat Divas) आखिर अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

पहाड़ों से घिरी खूबसूरत घाटियां प्रकृति के अनमोल नजारे हैं और हमारे रक्षक भी। इनकी खूबसूरती प्रकृति के करीब होने का अहसास कराती है। यही कारण है कि हर साल 11 दिसंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस मनाया जाता है।

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International Mountain Day Kab Manaya Jata Hai?
Date International Mountain Day हर साल 11 दिसंबर को मनाया जाता है।
शुरुआत 11 दिसंबर 2003 से अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस मनाया जाने लगा।
विवरण पहाड़ न केवल निवासियों के लिए बल्कि तराई में रहने वाले लाखों लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ये विश्व की प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल हैं।
 International Mountain Day

इसका उद्देश्य है कि लोग पहाड़ों पर रहने वाले लोगों की समस्याओं के प्रति जागरूक हों। जलवायु और भूमिगत परिवर्तनों के कारण पहाड़ों की भौगोलिक स्थिति बदल रही है, इसलिए इन क्षेत्रों को विकसित और संरक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही इसका उद्देश्य लोगों को इसकी समृद्ध जैव विविधता के बारे में जागरूक करना है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय दिवस कब मनाया जाता है?

अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस हर साल 11 दिसंबर को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। 11 दिसंबर 2003 से पहली बार अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय दिवस मनाया गया।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस पहाड़ों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। इस दिन का उद्देश्य पर्वतीय जैव विविधता का संरक्षण करना है। जैव विविधता एक पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर सभी जीवित जीवों को शामिल करती है और यह एक क्षेत्र के भीतर जीवन की विविधता का संकेतक है। अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस का महत्व पानी, आपदा जोखिम में कमी, भोजन, स्वदेशी लोगों और जैव विविधता के बारे में जानकारी देना है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस कैसे मनाया जाता है?

पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। इसके साथ ही पर्वतारोहियों, सामाजिक संस्थाओं द्वारा इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसके लिए विभिन्न मंचों के माध्यम से प्रतियोगिताएं आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाता है। सोशल मीडिया पर भी लोग अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस पर इससे जुड़ी तस्वीरें, विचार साझा करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस का उद्देश्य

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्र के सतत विकास के महत्व को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने उजागर करना और पर्वतीय क्षेत्र के प्रति दायित्वों से अवगत कराना है। आज के समय में जलवायु और भूमिगत परिवर्तनों के कारण पहाड़ों की भौगोलिक स्थिति बदल रही है।

जंगलों के नष्ट होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, यह धरती और मानव जीवन के लिए गंभीर मामला है. ऐसे में जरूरी है कि लोग पहाड़ों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। इसीलिए लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए हर साल अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय दिवस मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय पर्वतीय दिवस के बहाने पर्यावरण में पहाड़ों की भूमिका बताई जाती है। 1992 में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक प्रस्ताव लाया गया था। इसमें पहाड़ों पर रहने वाले लोगों का ध्यान खींचा गया।

पर्वत के महत्व को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2002 को अंतर्राष्ट्रीय पर्वत वर्ष के रूप में घोषित किया। इसके बाद 11 दिसंबर 2003 से अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय दिवस मनाया जाने लगा। तब से यह प्रतिवर्ष 11 दिसंबर को मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के Theme

साल 2021 अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का Theme)-Sustainable mountain tourism.

साल 2020 अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का Theme)-Protecting mountain biodiversity.

साल 2019 अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का Theme)-Mountains matter for Youth.

साल 2018 अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का Theme)-Mountains Matter.

पर्वत किसे कहते हैं?

पहाड़ पृथ्वी की सतह का प्राकृतिक रूप से उठा हुआ हिस्सा है, जो आमतौर पर प्राकृतिक दुर्घटना से बनता है. पर्वत अधिकतर एक सतत समूह में होते हैं। पहाड़ 4 प्रकार के होते हैं:

वलित पर्वत- जब पृथ्वी की टेक्टॉनिक चट्टानें एक दूसरे से टकराती या सिकुड़ती हैं, जिससे पृथ्वी की सतह में मोड़ के कारण उभार आ जाता है। हिमालय, यूरोपीय आल्प्स, उत्तरी अमरीकी रॉकी, दक्षिणी अमरीकी एण्डीज, वगैरह सभी युवा अर्थात नये पर्वत हैं। ये दुनिया के सब्से नये पर्वत तथा सब से उच्छे पर्वत है। कुछ पर्वत पुराने है जिनको बने हुए बहुत समय हो चुका है। ये पर्वत अब नही बनते अर्थात अब ऊपर नही उठते बल्कि इनका अब धीरे धीरे अपरदन होना शुरू हो गया है जैसे आरावली पर्वतमाला।

भृंषोत्थ पर्वत या ब्लॉक पर्वत- भ्रंशोत्थ पर्वत या ब्लॉक पर्वत का निर्माण पृथ्वी के उपरी सतहो मे भ्रन्शन के द्वारा भूभाग के उपर उठने अथवा बहुत बडे भाग के टूट कर ऊर्ध्वाधर रूप से विस्थापित होने से होता है ऊपर उठे खण्ड को उत्खण्ड(हार्स्ट) तथा नीचे धँसे खण्डों को द्रोणिका भ्रंश(ग्राबेन) कहा जाता है जैसे युरोप की राइन घाटी तथा वॉसजेस पर्वत हार्ज। यह अच्छा उदाहरण। है।

ज्वालामुखी पर्वत- ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण पृथ्वी के अंदर से निकले लावा के उदगार के जमाव से होता है। जैसे:- वर्मा का माउंट पोपा, मौना लोवा, विसुविअस आदि।

अवशिष्ट पर्वत- अवशिष्ट पर्वत का निर्मान वाह्य दुतो के मलवो के जमाव से होता है। जैसे फ्यूजियामा (जापान), पारसनाथ पहाड़ (झारखंड)।

माउंट एवरेस्ट दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत है। पर्वत पूरी पृथ्वी की सतह के लगभग 22 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं।

पर्वत जल के भण्डार हैं। 70% आबादी को पीने का पानी किसी न किसी रूप में पहाड़ों से निकलने वाली नदियों से मिलता है। भूमिगत जल के भंडारण में पर्वत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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