National Doctors Day 👨‍⚕️ राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस क्यों मनाते हैं | डॉक्टर्स डे का महत्व, दुनिया के 7 सबसे बड़े प्राकृतिक चिकित्सक

National Doctors Day क्यों मनाते हैं? राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पहली बार कब मनाया गया था? डॉक्टर्स डे का महत्व, दुनिया के 7 सबसे बड़े डॉक्टर। हंसने के फायदे बहुत हैं। एक मिनट समय निकाल कर अवश्य पढ़ें।

यह विशेष दिन डॉक्टरों के महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस भारत में हर साल 1 जुलाई को महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि के सम्मान में मनाया जाता है।

यह दिन उन सभी डॉक्टरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का कार्य करता है जिन्होंने हमारी जरूरत के समय में निस्वार्थ भाव से हमारी मदद की और अपने रोगियों के स्वास्थ्य के लिए अथक प्रयास किया।

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National Doctors Day 👨‍⚕️ Kab Manaya Jata Hai?
Date हर साल 1 जुलाई को
विवरण डॉ. बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में, 1991 से भारत में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (National Doctors Day) मनाया जाता है।
Needle in hand of doctor in white uniform

हमारे देश में डॉक्टर को भगवान के रूप में देखा जाता है। डॉक्टर्स डे देश के डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। डॉक्टर्स डे यानी 1 जुलाई को देश के महान डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय की पुण्यतिथि भी होती है।

कोई भी व्यक्ति आज स्वस्थ हैं तो कल बीमार हो सकते हैं। इसलिए उसे डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। ऐसे कई मरीज डॉक्टर के पास आते हैं, यह देखकर कि उनकी जान बचाना असंभव है, लेकिन डॉक्टर अपने ज्ञान और दवाओं के जरिए उस मरीज को एक नया जीवन देते हैं।

इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और डॉक्टरों को उनकी समर्पित सेवा के लिए धन्यवाद देना है।

National Doctors Day क्यों मनाते हैं?.

भारत में हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर बिधान चंद्र राय के जन्मदिन के रूप में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। यहां आपको बता दें कि एक बेहतरीन डॉक्टर के अलावा बिधान चंद्र राय पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

वर्ष 1991 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाना शुरू किया। भारत में 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। यह विशेष दिन समाज में डॉक्टरों के महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए है।

यह दिन उनकी स्मृति के रूप में भी मनाया जाता है। इस खास दिन पर केंद्र सरकार ने 1991 में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाना शुरू किया था।

डॉ. बिधानचंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को खज़ांची, पटना, बिहार में हुआ था। वह अपने छात्र जीवन में एक मेधावी छात्र थे और इसीलिए उन्होंने अन्य छात्रों की तुलना में अपनी शिक्षा जल्दी पूरी की।

डॉ. बिधानचंद्र रॉय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में और उच्च शिक्षा इंग्लैंड में पूरी की। डॉक्टर के साथ विधानचंद्र रॉय एक सामाजिक कार्यकर्ता, आंदोलनकारी और राजनीतिज्ञ भी थे।

वे बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने। बिधानचंद्र रॉय ने सियालदह से एक डॉक्टर के रूप में अपना करियर शुरू किया और एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के रूप में भी काम किया।

वह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असहयोग आंदोलन का भी हिस्सा थे। उन्होंने महात्मा गांधी के कहने पर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। समाज के प्रति बिधानचंद्र रॉय के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

वह जो कुछ भी कमाते थे, सब कुछ दान कर देते थे। आज भी वह मेडिकल प्रोफेशन में आने वालों के लिए रोल मॉडल हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने निस्वार्थ भाव से घायलों और पीड़ितों की सेवा की।

डॉक्टर्स डे पहली बार कब मनाया गया था?

पहला राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस जुलाई 1991 में मनाया गया था। यह दिन चौबीसों घंटे उनकी सेवा करने वाले डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर देता है।

डॉक्टर दिवस का महत्व

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाने के पीछे के महत्व की बात करें तो इस दिन डॉक्टरों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है।

भारत में, इस दिन को भारत के सबसे प्रसिद्ध चिकित्सकों में से एक, डॉ बिधान चंद्र रॉय की पुण्यतिथि और जन्मदिन दोनों के रूप में भी मनाया जाता है।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज डॉक्टर इस महामारी में अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को नया जीवन देने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

इस दिन लोगों को डॉक्टरों के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। साथ ही, हमारे जीवन में डॉक्टरों के योगदान की सराहना की जाती है।

डॉक्टर्स कठिन और चुनौतीपूर्ण समय का सामना कर रहे हैं. COVID-19 महामारी सभी के लिए मुश्किलों से भरा हुआ है। यहां तक कि डॉक्टर भी जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

जहां एक तरफ लोग खुद को आइसोलेट कर रहे हैं। वहीं, हम डॉक्टर महामारी से लोगों का जीवन बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

महामारी के दौरान, डॉक्टर हर आपदा में एक सुपर हीरो की तरह सामने आए हैं और समाज की भलाई के लिए अपने काम के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ आए हैं।

हम सभी इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. यह शायद हमारे जीवन का सबसे कठिन समय है। डॉक्टरों के लिए यह सुनिश्चित करना और भी मुश्किल हो गया है कि जो लोग संक्रमित हैं उन्हें उचित चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहें।

अगर हाल के दिनों की बात करें तो डॉक्टरों ने कोरोना काल में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने कई घंटे पीपीई किट में रहकर कोरोना मरीजों को ठीक किया। देश में इस महामारी में सैकड़ों डॉक्टरों की मौत भी हुई।

जिस तरह से डॉक्टर और स्वास्थ्य कार्यकर्ता समाज के लिए योगदान दे रहे हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं, उनका हर दिन सम्मान किया जाना चाहिए, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों का योगदान अतुलनीय है।

दुनिया के 7 सबसे बड़े डॉक्टर।

ये 7 चीजें हमेशा अपने पास रखें, सभी रोग और दर्द दूर हो जाएंगे।

  1. सूरज की किरणे।
  2. हर रात 6/8 घंटे सोएं।
  3. शुद्ध शाकाहारी भोजन।
  4. हर रोज व्यायाम।
  5. अपने आप पर यकीन रखो।
  6. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  7. अच्छे दोस्त बनाएं, नशे से दूर रहें।

जरा मुस्कुरा के देखे, दुनिया हसती नजर आएगी !
सुबह सैर कर के तो देखे, सेहत ठीक हो जाएगी !
व्यसन छोड के तो देखे, इज्जत बन जाएगी !
खर्च घटा कर के तो देखे, अच्छी नीँद आएगी !
मेहनत कर के तो देखे, पैसे की तंगी चली जाएगी !
संसार की अच्छाई तो देखे, बुराई भाग जाएगी !
ईश्वर का ध्यान कर के तो देखे, उलझने दुर हो जाएगी !
माता-पिता की बात मान कर देखे , जिन्दगी संवर जाएगी !

एक मिनट निकाल कर पढ़ें।

एक आदमी जंगल से गुजर रहा था, उसे चार स्त्रियां मिलीं!
आदमी ने पूछा- बहन तुम्हारा नाम क्या हैं?
स्त्री ने कहा- बुद्धि।
आदमी- तुम कहां रहती हो?
स्त्री- मनुष्य के दिमाग में.

आदमी ने स्त्री से पूछा- बहन तुम्हारा नाम क्या हैं?
स्त्री ने कहां- लज्जा।
आदमी- तुम कहां रहती हो?
स्त्री- आंख में.

आदमी ने स्त्री से पूछा- तुम्हारा क्या नाम हैं ?
स्त्री ने कहां- हिम्मत।
आदमी- कहां रहती हो ?
स्त्री- दिल में।

आदमी ने स्त्री से पूछा- तुम्हारा नाम क्या हैं ?
स्त्री ने कहां- तंदुरूस्ती।
आदमी- कहां रहती हो ?
स्त्री- पेट में.

वह आदमी अब थोडा आगे बढा , तों फिर उसे चार पुरूष मिले।

आदमी ने पहले पुरूष से पूछा- तुम्हारा नाम क्या हैं ?
पुरूष ने कहां - क्रोध।
आदमी- कहां रहतें हो ?
पुरूष- दिमाग में.
आदमी- दिमाग में तो बुद्धि रहती हैं, तुम कैसे रहते हो ?
पुरूष- जब मैं वहां रहता हुं, तो बुद्धि वहां से विदा हो जाती हैं !

आदमी ने दूसरे पुरूष से पूछा- तुम्हारा नाम क्या हैं ?
पुरूष ने कहां - लोभ।
आदमी- कहां रहतें हो ?
पुरूष- आंख में.
आदमी- आंख में तो लज्जा रहती हैं, तुम कैसे रहते हो ?
पुरूष- जब मैं आता हूं , तो लज्जा वहां से प्रस्थान कर जाती हैं !

आदमी ने तीसरें पुरूष से पूछा- तुम्हारा नाम क्या हैं ?
पुरूष ने कहां
- भय।
आदमी- कहां रहतें हो ?
पुरूष- दिल में.
आदमी- दिल में तो हिम्मत रहती हैं, तुम कैसे रहते हो ?
पुरूष- जब मैं आता हूं, तो हिम्मत वहां से नौ दो ग्यारह हो जाती हैं !

आदमी ने चौथे पुरूष से पूछा- तुम्हारा नाम क्या हैं ?
पुरूष ने कहां- रोग।
आदमी- कहां रहतें हो ?
पुरूष- पेट में.
आदमी- पेट में तो तंदरूस्ती रहती हैं, तुम कैसे रहते हो?
पुरूष- जब मैं आता हूं, तो तंदरूस्ती वहां से रवाना हो जाती हैं.

जीवन की हर विपरीत परिस्थिथि में, यदि हम उपरोक्त वर्णित बातो को याद रखे , तो कई चीजे टाली जा सकती है !

हंसने के फायदे भी कई हैं.

क्या आप जानते हैं कि हंसते समय हम बात करते समय जितनी ऑक्सीजन लेते हैं उससे छह गुना अधिक ऑक्सीजन लेते हैं. इस तरह शरीर को अच्छी मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है।

Doctor कहते हैं कि जब आप मुस्कुराते हैं तो आपका दिमाग अपने आप यह सोचने लगता है कि आप खुश हैं, यह प्रक्रिया पूरे शरीर में प्रवाहित होती है और आप आराम महसूस करने लगते हैं।

हंसी को अपनी आदतों में शामिल करें और फिर देखें कि तनाव आपके पास से हमेशा के लिए निकल जायेगा, साथ ही आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी।

जब आप हंसने लगते हैं तो शरीर में रक्त का संचार तेजी से होता है। तनाव में भी हंसने की क्षमता हो तो दुख भी कम लगता है।

कहा जाता है कि इंसान जितना हंसता है, उसका सेंस ऑफ ह्यूमर उतना ही बेहतर होता है।

हंसने के बाद आप कभी थकान महसूस नहीं करेंगे और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करेंगे।

यह दिमाग के साथ-साथ शरीर का भी व्यायाम करता है।

हंसने से मांसपेशियों का तनाव कम होता है।

Editor

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