Mahila Sashaktikaran Diwas | Women’s Empowerment Day | नारी सशक्तिकरण दिवस कब मनाया जाता है? अर्थ, कानून योजना

Mahila Sashaktikaran का क्या अर्थ है? नारी शक्ति की परिभाषा क्या है? इसकी आवश्यकता क्या है? महिला सशक्तिकरण का सीधा संबंध महिलाओं के अधिकारों और शक्तियों से है ताकि वह अपने जीवन से जुड़े सभी फैसले खुद ले सकें।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च मनाया जाता है। महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ यह है कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें अपने सभी निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होना होगा। जिससे वह परिवार और समाज की सभी बेड़ियों से मुक्त होकर अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय ले सकती है।

भारत प्राचीन काल से ही अपनी संस्कृति, परंपराओं, समाज, धर्म और भौगोलिक विशेषताओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत एक पुरुष रूढ़िवादी राष्ट्र के रूप में भी जाना जाता था। भारतीय पुरुषों द्वारा महिलाओं को कभी भी बोलने या कोई निर्णय लेने का मौका नहीं दिया जाता है।

महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक

उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सकता है, उन्हें सक्षम बनाया जा सकता है कि वे अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ खड़े होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें, साथ ही अपने जीवन के सभी फैसले खुद ले सकें। महिलाएं देश का आधा हिस्सा हैं, इसलिए इस चीज को पूरी तरह से शक्तिशाली बनाने के लिए पुरुषों का ही नहीं बल्कि महिलाओं का भी सहयोग जरूरी है, इसलिए महिला सशक्तिकरण बहुत जरूरी है।

इस समाज में महिला सशक्तिकरण महिलाओं को समान दर्जा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यही एकमात्र माध्यम है जिससे महिलाएं अपने अधिकारों और शक्ति के बारे में जान सकती हैं। कहा जाता है कि जब कोई महिला अपने ऊपर लगी जंजीरों को तोड़ने लगेगी तो दुनिया की कोई ताकत उसे रोक नहीं पाएगी।

महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, ताकि उन्हें भी पुरुषों के समान रोजगार और शिक्षा के अवसर मिल सकें। जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्त कर सके।

Mahila Sashaktikaran दिवस कब मनाया जाता है?
Diwas Ka Naam Date Year
Mahila Sashaktikaran Diwas 8 March Every Year
Women’s Empowerment Day | Mahila Sashaktikaran | नारी सशक्तिकरण दिवस 8 मार्च

महिला सशक्तिकरण दिवस का सही अर्थ समाज की महिलाओं को उनके अधिकारों को प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। एक महिला सब कुछ करने में सक्षम है।

एक महिला पुरुषों की तुलना में अधिक मेहनत कर सकती है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि उसे अपना निर्णय लेने का समान अधिकार हो। एक महिला में इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वह अपने परिवार, समाज, देश और खुद के लिए फैसले ले सके।

लिंग के आधार पर भेदभाव, अशिक्षित महिलाओं के खिलाफ हिंसा काफी हद तक है। निचली जातियों की महिलाएं जैसे अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति, आदिवासी समुदाय में विशेष रूप से कमजोर हैं।

महिलाओं को ज्यादातर अनपढ़ और निर्णय लेने की क्षमता की कमी के कारण हिंसा का सामना करना पड़ता है। इसलिए भारत में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता है। भारत में महिला सशक्तिकरण शहर, ग्रामीण स्तर, शिक्षा, जाति, आयु, वर्ग आदि जैसे विभिन्न पहलुओं पर निर्भर करता है।

Mahila Sashaktikaran के लिए स्थानीय स्तर पर कई कानून

भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर कई कानून, कार्यक्रम, संगठन हैं, जो महिलाओं को जागरूक करते हैं। वे उन्हें सक्षम बना रहे हैं कि वे अपने और अपने परिवार, समाज और देश से जुड़े फैसले ले सकें।

हमारे समाज में महिलाओं की आवाज को हमेशा दबाया जाता है, उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। लड़का और लड़की में भेदभाव होता है। हजारों वर्षों से पुरुषों द्वारा महिलाओं का शोषण किया जा रहा है और इन सबके परिणामस्वरूप, हमारे देश की महिलाओं को दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, यौन हिंसा आदि का सामना करना पड़ा।

इस दुनिया में आने से पहले हर दिन एक नन्ही जान की जान चली जाती। महिलाओं पर इन सभी अत्याचारों को रोकने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता थी।

महिला सशक्तिकरण के माध्यम से महिलाओं को यह विश्वास दिलाया जाएगा कि वे चाहें तो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सकती हैं। वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। एक मजबूत महिला में इतनी क्षमता होती है कि वह अपने पूरे समाज को सशक्त बना सकती है।

भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य है कि महिलाओं को साक्षर बनाया जाए, उनमें इतनी क्षमता विकसित की जाए कि वे अपने, अपने परिवार, अपने समाज, देश से जुड़े सभी फैसले ले सकें। अधिकारों के लिए लड़ें और उनके खिलाफ हिंसा को रोकें।

महिला सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं के विकास के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं बनाई गई हैं। समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना

इस योजना के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या और बालिका शिक्षा पर काम किया गया है, साथ ही बेहतर भविष्य के लिए लड़कियों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

इस योजना के तहत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिया गया है। ताकि उन्हें सशक्त बनाया जा सके और वे शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें।

महिला हेल्पलाइन योजना

इस योजना के तहत महिलाओं की सहायता के लिए 24 घंटे आपातकालीन सहायता सेवा प्रदान की जाती है। जिसके जरिए महिलाएं खुद अपने खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा या अपराध की शिकायत कर सकती हैं। इस योजना के तहत महिलाएं निर्धारित नंबर 181 पर डायल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

महिलाओं के लिए आरक्षण

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की घोषणा की है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार के प्रयास भी किए गए हैं। इसका परिणाम यह देखने को मिला कि कई राज्यों में बड़ी संख्या में महिलाओं को ग्राम पंचायत अध्यक्ष के रूप में चुना गया।

किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी योजना

यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की देखरेख में चलाई जा रही है। इस योजना से मिलने वाले लाभों को दो समूहों में बांटा गया है। पहले समूह में 11-15 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियां शामिल हैं जिन्हें सरकार द्वारा पका हुआ भोजन दिया जाता है। दूसरे समूह में 15-18 वर्ष की आयु की महिलाएं शामिल हैं जिन्हें आयरन की गोलियां और अन्य दवाएं प्रदान की जाती हैं।

इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना

इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो बच्चों के जन्म तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

स्वाधार घर योजना

इस योजना के तहत समाज की कुछ महिलाओं जैसे विधवा, मानसिक रूप से विकलांग, निराश्रित महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है, साथ ही इस योजना के तहत तलाकशुदा महिलाओं को कानूनी परामर्श, चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की जाती है।

Women’s Empowerment Day को बढ़ावा देने के लिए कानून

महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कानून भी बनाए हैं ताकि समाज में महिलाओं का शोषण न हो।

  • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम।
  • हिंदू विवाह अधिनियम।
  • दहेज निषेध अधिनियम।
  • मातृत्व लाभ अधिनियम।
  • गर्भावस्था अधिनियम।
  • कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम।
  • लिंग परीक्षण तकनीक अधिनियम।
  • बाल विवाह रोकथाम अधिनियम।
  • राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम।
  • विदेशी विवाह अधिनियम।
  • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम।

सरकार द्वारा महिलाओं के लिए इतने कानून बनाने के बावजूद महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय है। इसका मुख्य कारण महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक अधीनता और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होना है।

महिला सशक्तिकरण के रास्ते में आने वाली समस्याएं। भारतीय समाज एक ऐसा समाज है जिसमें कई तरह के रीति-रिवाज, मान्यताएं, परंपराएं शामिल हैं। महिला सशक्तिकरण के रास्ते में ये कुछ सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

पुरानी विचारधारा के कारण महिलाओं को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। जिससे रोजगार दूर होने के कारण उसे उचित शिक्षा भी नहीं मिल पाती है और इसी विचारधारा के कारण वह हमेशा अपने आप को पुरुषों से कम समझती है।

भारत में केवल 64 प्रतिशत महिला शिक्षा दर है जबकि पुरुष शिक्षा दर 80 प्रतिशत है। आजकल कुछ परिवार लड़कियों को स्कूल भेजते हैं, लेकिन आठवीं, दसवीं पास करने के बाद उन्हें पढ़ाई से बाहर कर दिया जाता है ताकि वे घर की चार दीवारी के भीतर रहकर घर के काम सीख सकें।

पुरुष प्रधान समाज होने के कारण महिलाओं के लिए भी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। महिलाओं को अपने कार्यक्षेत्र में उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है जिसके कारण वे रोजगार के क्षेत्र में प्रगति नहीं कर पाती हैं। उनके साथ लिंग स्तर पर भी भेदभाव किया जाता है, यह हमेशा माना जाता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में कमजोर होती हैं।

जब एक महिला अपना कदम आगे बढ़ाती है, तो उसका परिवार भी आगे बढ़ता है, उसका गांव भी आगे आता है और सबका विकास होता है। लैंगिक समानता को प्राथमिकता देते हुए पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत देश के लिए यह आवश्यक है कि महिलाएं शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत हों।

देश को मजबूत बनाने के लिए हमें सबसे पहले महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार, हिंसा को रोकना होगा ताकि महिलाओं का विकास हो सके और वे देश के विकास में अपनी भूमिका निभा सकें। लंबे संघर्ष के बाद महिलाओं को संपत्ति के अधिकार, वोट का अधिकार, नागरिक अधिकार, शादी और रोजगार के मामले में कानूनी सुरक्षा मिली है।

हमारे देश में प्रतिभाशाली महिलाओं के उदाहरण कम नहीं हैं। इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, झांसी की रानी, पीटी उषा आदि कुछ ऐसी महिलाओं के उदाहरण हैं जिन्होंने दया और बहादुरी दिखाकर इस देश को गौरवान्वित किया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें महिलाओं के प्रति लोगों की पुरानी सोच को बदलना होगा। यदि इस देश की प्रगति में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी होगी, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत विकासशील से एक विकसित देश बन जाएगा।

यहीं पर हमारा लेख समाप्त होता है। उम्मीद है, इस लेख के माध्यम से आप महिला सशक्तिकरण से जुड़े सभी पहलुओं को समझ गए होंगे। यह लेख आपको कैसा लगा? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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